2022 में मधुमक्खी पालन कैसे करें | madhumakhi palan business in hindi

भारत में पहले मधुमक्खी पालन का काम ऊंची जगह वाले राज्यों में किया जाता था. लेकिन आज के समय में मधुमक्खी पालन कई राज्यों में किया जा रहा है. क्योंकि यह एक ऐसा व्यवसाय है. जिससे बहुत ही कम खर्च में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है. इसलिए मधुमक्खी पालन को आज के समय में व्यवसाय के रूप में कई जगह किया जा रहा है.

मधुमक्खी से उत्पन्न होने वाले शहद की डिमांड आज के समय में बहुत अधिक है. क्योंकि आप भी अच्छे से जानते हैं कि शहद का उपयोग कई तरह की दवाइयों बनाने में किया जाता है. इसके अलावा शहद का उपयोग हमारे सेहत को सुधारने के लिए हर घर में किया जाता है. शहद की बढ़ती मांग को देखकर मधुमक्खी पालन करके शहद का उत्पादन निकाल कर अच्छा लाभ कमाया जा सकता है.

यदि आप भी मधुमक्खी पालन कैसे करें इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करना चाहते हो तो हमारे साथ अंत तक बना रहे.
आज के इस लेख में मधुमक्खी पालन कैसे शुरू करें,मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए कौन-कौन सी चीजों की आवश्यकता होगी इसके बारे में पूरी जानकारी विस्तार पूर्वक बताई जाएगी.

Contents

मधुमक्खी पालन का इतिहास ( history of madhumakhi)

मधुमक्खी पालन की प्रक्रिया प्राचीन काल से चल रही है.
पुराने जमाने में मधुमक्खी जंगलों या पहाड़ी इलाकों पर ही पाई जाती थी. जिनसे बहुत कम मात्रा में शहद निकाला जा सकता था. आज भी कई जगह पुराने तकनीकी का इस्तेमाल करके शहद निकाला जाता है. जिसमें मधुमक्खी के छत्ता छोड़ने का इंतजार किया जाता है या फिर धुएं से उनको उड़ाया जाता है. और फिर छत्ता को निचोड़ कर या फिर आग से गर्म करके शहद निकाला जाता है. फिर उसे कपड़े की मदद से छान लिया जाता है. इस प्रक्रिया से शहद तो प्राप्त हो जाता है. लेकिन वह शहद साफ नहीं रहता उसमे में धूल और मिट्टी मिल जाती हैं. जिसके कारण मार्केट में उसके अच्छे दाम भी नहीं मिलते है. इस प्रक्रिया में मधुमक्खी को उड़ाने पर हमेशा के लिए वह अपना छत्ता छोड़ जाती हैं. और फिर उस जगह वह अपना छत्ता वापिस नहीं बनाती थी. जिसके कारण एक जगह से एक ही बार शहद प्राप्त किया जाता था. लेकिन आज के समय में आधुनिक तकनीकी का उपयोग करके बहुत सारा शहद निकाला जा सकता है. जिससे लाभ भी अच्छा खासा कमाया जा सकता है.

मधुमक्खी की प्रजातियां ( species of madhumakhi)

इस व्यवसाय के लिए पांच प्रकार के मधुमक्खियों का इस्तेमा अधिकतर किया जाता है.

एपिस मेलीफेरा: यूरोपियन या इतालवी मधुमक्खी को हमारे देश में बहुत अधिक पाला जाता है. इस प्रजाति की मधुमक्खी से एक बार में 25 किलो से लेकर 40 किलो तक शहद प्राप्त किया जा सकता है. इस तरह की मधुमक्खियों को पेटियों में भी पाला जा सकता है.

एपिस प्लॉरिया: इस प्रजाति की मधुमक्खियां छोटी होती हैं. जिससे एक बार में करीब 250 ग्राम से लेकर 1 किलो तक शहद प्राप्त किया जाता है. इस प्रकार की मधुमक्खियां छोटे छत्ते बनाती हैं. जो आमतौर पर पेड़ों पर लटकते हुए दिखाई देते हैं.

टेट्रागोनूला एरिडीपेनिस: यह मधुमक्खी बहुत ही कम शहद देती हैं. इस तरह की मधुमक्खिया से सिर्फ एक बार में 100 ग्राम शहद ही प्राप्त किया जा सकता है.

एपिस इंडिका: यह मधुमक्खी एक बार में 2 किलो शहद बनाती हैं इस प्रजाति की मधुमक्खी को सतकोचवा मधुमक्खी भी कहा जाता है. क्यों की यह पेड़ या दीवार पर एक साथ 7 छत्ते बनती है इसे आप पेटियो में भी पाल सकते हो.

एपिस डोरसॅटा: इस प्रजाति की मधुमक्खियों से सबसे ज्यादा शहद प्राप्त किया जा सकता है. इन मधुमक्खियों से एक बार में 30 से 50 किलो तक शहद निकाला जा सकता है. लेकिन इस तरह की मधुमक्खियां बहुत खतरनाक होती है. इसलिए इनका पालन नहीं किया जा सकता है. इनका शहद सिर्फ जंगलों से ही प्राप्त किया जा सकता है.

एक छत्ते में पाई जाने वाली मधुमक्खियों के प्रकार ( types of bees found in a hive)

एक मधुमक्खियों के छत्ते में तीन प्रकार की मधुमक्खियां पाई जाती है

रानी मधुमक्खी: रानी मधुमक्खी अंडे देने का काम करती है और इन अंडों की सुरक्षा का काम अन्य मधुमक्खियां करती है.

श्रमिक मधुमक्खियां: श्रमिक मधुमक्खियों की संख्या छत्ते पर सबसे अधिक होती है. इनकी पेट पर कई समांतर धरिया होती है. इन मधुमक्खियों के द्वारा ही शहद जमा किया जाता है डंक मारने वाली मधुमक्खियां भी यही होती है.

नर मधुमक्खी: इस मधुमक्खी का काम सिर्फ रानी को गर्भधान करना होता है. इसके अलावा इसको और कोई काम नहीं करना पड़ता है. यह मधुमक्खी छत्तो में जमा मधु को खाता है. नर मधुमक्खी श्रमिक मधुमक्खी से बड़ा और रानी मधुमक्खी से छोटा दिखाई देता है.

मधुमक्खी पालन कैसे शुरू करें ( how to start madhumakhi palan)

चलिए दोस्तों जान लेते हैं कि मधुमक्खी पालन कैसे शुरू करें. सबसे पहले आपको मधुमक्खी पालने के लिए खुली जगह की आवश्यकता होगी. जहां पर मधुमक्खी को सुरक्षित रखा जा सके. जगह चुनाव आपको इस तरह से करना है कि उसमें 150 से 200 मधुमक्खी की बेटियों को रखा रखा जा सके. जिसके लिए आपको कम से कम दो से ढाई हजार स्क्वेयर फिट जगह की आवश्यकता होगी.
यदि आप छोटे स्तर पर शुरू करना चाहते हो तो आपको कम जगह की आवश्यकता होगी जिसका चयन आप अपने हिसाब से कर सकते हो.

जगह का चुनाव करने के बाद आपको मधुमक्खी की नस्ल का चयन करना होगा. आपको ऐसी मधुमक्खी का चयन करना है जो अधिक मात्रा में शहद का उत्पादन करती है.

मधुमक्खी की एक पेटी करीब ₹4000 में मिलती है जिसमें लगभग तीन सौ के आसपास मधुमक्खी आती है. मधुमक्खियों का चयन करने के बाद आपको कुछ उपकरण जुटाने की भी जरूरत होती है. जैसे रिमूविंग मशीन, चाकू, ड्रम, हाथों की सुरक्षा के लिए दस्ताने आदि उपकरण की व्यवस्था करनी होती है.

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मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए प्रशिक्षण या अनुभव प्राप्त करें ( madhumakhi palan in training or experience )

मधुमक्खी पालन व्यवसाय शुरू करने से पहले आपको इसकी तकनीकी ज्ञान एवं अनुभव प्राप्त कर लेना चाहिए. ताकि आपको मधुमक्खी पालन शुरू करने में किसी दिक्कतों का सामना ना करना पड़े. अनुभव प्राप्त करने के लिए आप अपने स्थानीय क्षेत्र में इस व्यवसाय को पहले से किए जाने वाले व्यक्ति के साथ कुछ महीने काम करेक अनुभव प्राप्त कर सकते हो.

और यदि आप मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहते हो तो उसके लिए आपको अपने नजदीकी कृषि विभाग या कृषि यूनिवर्सिटी से संपर्क करना होगा.
वहां से आपको मधुमक्खी पालन के प्रशिक्षण के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाएगी.

मधुमक्खी पालन के लिए जगह ( madhumakhi palan place)

दोस्तों सबसे पहले आपको मधुमक्खी पालन शूरू करने के लिए ऐसी खुली जगह का चुनाव करना होगा. जहां पर आसपास अच्छा वातावरण और पेड़ पौधे हो. इसके अलावा मधुमक्खी पालन के लिए सुखी जगह का होना आवश्यक है. किन्तु आपको इस बात का भी ध्यान रखना है कि जिस जगह का चयन आप कर रहें हो वहां पर पर्याप्त मात्रा में पानी होना चाहिए.

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मधुमक्खी पालन के लिए मधुमक्खियों की प्रजातियों का चयन करें ( Select bee species in madhumakhi palan )

जगह का चुनाव करने के बाद आपका अगला कदम मधुमक्खियों की नस्ल का चुनाव करने का होना चाहिए. वैसे तो हमारे देश में मधुमक्खियों की कई प्रजाति पाई जाती है. लेकिन आपको ऐसी नस्ल का चयन करना है जो अधिक मात्रा में शहद का उत्पादन करती है. एपिस मेलीफेरा शहद का अधिक उत्पादन करने वाली प्रजातियों में से एक है. इन प्रजातियों के मधुमक्खियों के एक बॉक्स में से लगभग 70 से 80 किलो तक शहद निकाला जा सकता है.
एपिस मेलीफेरा प्रजाति की मधुमक्खियों को अपने व्यवसाय में जरूर शामिल करना चाहिए. क्योंकि यह सबसे अधिक शहद और अंडे देने वाली प्रजाति है. जिसे पालकर आपको अच्छा मुनाफा हो सकता है.

मधुमक्खी पालन व्यवसाय के लिए जरूरी उपकरण ( Equipment in madhumakhi palan )

अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में अलग-अलग उपकरणों की जरूरत होती है. इसीलिए आप के लिए कौन सा उपकरण सही है इसका पता आप अपने स्थानीय क्षेत्र के मधुमक्खी पालक से लगा सकते हो. जिनमें से कुछ उपकरणों के बारे में हमने नीचे बताया गया है.

  • क्वीन गेट
  • हाइव गेट
  • स्मोकर
  • हनी एक्सट्रेक्टर
  • पोलेन ट्रेप
  • बी बॉक्सेज
  • बी वैक्स शिट
  • मोटे और पतले बी कीपिंग ब्रश
  • क्लीन रियरिंग कीट
  • मधुमक्खी विष कलेक्ट करने का यंत्र
  • रॉयल जेली प्रोडक्शन और एक्सटेंशन कीट
  • प्रोपोलिस स्टिप

मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए सही समय ( Right time to madhumakhi palan)

मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए नवंबर से जनवरी का समय अच्छा माना जाता है. समय से पहले ही आप मधुमक्खी पालन के फार्म में सभी चीजों की व्यवस्था कर ले. उसके बाद समय आने पर तुरंत मधुमक्खी पालन शुरू कर दें. किन्तु आपको इस बात का ध्यान रखना है कि मधुमक्खी पालन उसी जगह करना है. जहां पर अधिक मात्रा में हरियाली और पेड़ पौधे हो. जिससे मधुमक्खियों को शहद इकट्ठा करने में आसानी होगी.

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मधुमक्खी पालन करने की प्रक्रिया (bee keeping process)

मधुमक्खी पालन नवंबर से जनवरी के बीच में ही किया जाना चाहिए. मधुमक्खी पालन करने के लिए सबसे पहले जिस जगह का चुनाव आपने मधुमक्खी पालन करने के लिए किया है, उस जगह पर मधुमक्खी की पेटियां को रख दें. किंतु याद रहे पेटियां जमीन से कम से कम 6 इंच ऊंची रहनी चाहिए. ताकि वह मौसम की मार से बच सके.
उन पेटियों के अंदर एक जाली रहती है जहा पर मधुमक्खियां शहद बनाती है. यदि पेटियां में शहद कम मात्रा में आय तो उसमें चीनी को उबालकर डाल सकते हो जिससे शहद की क्वालिटी अच्छी आयगी.

मधुमक्खी के परिवार का विभाजन करे ( divide the bee family)

मधुमक्खी के परिवार का विभाजन करना बहुत जरूरी है. क्योंकि अच्छे मौसम में मधुमक्खियों की संख्या बढ़ जाती है. जिसके कारण वह पेटियों के अंदर नहीं आ पाती है और वह पेटियां छोड़ कर भाग भी सकतीं है.

विभाजन के लिए मूल परिवार के पास एक खाली बक्सा रखें 50% ब्रुड, शहद, व पराग वाले फ्रेम में रखे और रानी वाला फ्रेम भी नए बक्से मे रखे. यदि रानी मधुमक्खी नए बक्से में हो तो अच्छी बात है. अन्यथा दूसरी मधुमक्खियां स्वयं ही रानी मक्खी बना लेगी. इन दोनों पेटियों को हर रोज एक दूसरे से एक एक फीट दूर करते जाएं और इस तरह एक नई पेटी का निर्माण हो जाएगा.

मधुमक्खियों की पेटियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे ले जाएं (How to take from place to place )

ऐसे कई मधुमक्खी पालक है जो अपनी पेटियों को मौसम की वजह से या फिर अन्य किसी कारण से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं. यदि आप भी अपनी पेटियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना चाहते हो तो आपको निम्न बातों को ध्यान में रखना होगा.

  • जिस स्थान पर आप पेटियां ले जाना चाहते हैं उस स्थान की जगह पहले से ही तय कर ले.
  • यदि छत्तो में अधिक सहद हो तो उसे अलग निकाल ले और फिर पेटी को बारीक किल से पेक कर दे.
  • पेटी के प्रवेश द्वार पर लोहे की जाली जरूर लगा दे जिससे मधुमक्खियां बाहर ना आ सके.
  • पेटी को गाड़ी में लंबाई की दिशा में रखें और ध्यान रखें की गाड़ी मैं उन बक्सो को कम से कम झटके लगे ताकि छत्ते को किसी प्रकार का नुकसान ना हो.
  • गर्मियों में पेटी को ले जाते समय उस पर पानी जरूर छिड़क दें और जहां तक हो सके गर्मी के मौसम मैं रात के समय पेटी को एक जगह से दूसरी जगह तक ले जाए.
  • नई जगह पर पेटी को 7 से 10 फीट की दूरी पर रखें और ध्यान रहे पेटी का मुंह पूर्व-पश्चिम की ओर होना चाहिए.

मधुमक्खियों के छत्तों से शहद निकालने की प्रक्रिया( madhumakhi palan process)

मधुमक्खियों की पेटियो में से हर 5 से 6 दिन बाद शहद निकाला जाता है. या फिर मधुमक्खियों के छत्ते पूरी तरह शहद से भर जाए तब आपको समझ लेना है कि आपके शहद निकालने का समय आ गया है. कई लोग अपने हाथों से ही शहद निकालते हैं. लेकिन आपको ऐसा नहीं करना है आपको अपनी सुरक्षा का ध्यान रखकर हनी एक्सट्रेक्टर नामक मशीन से शहद निकाल ना है.

जब मधुमक्खियां बॉक्स में ना हो तब आपको चाकू की सहायता से मधुमक्खियों के छत्ते को सावधानीपूर्वक पर निकाल लेना है. उसके बाद मशीन में आपको छोटे-छोटे बॉक्स दिखाई देंगे, उन बॉक्स में इन छत्तो को जमा देना है. और फिर मशीन को ऑन कर देना है. इस तरह बहुत ही बहुत ही आसानी शहद निकल जाएगा और फिर उस शहद को ड्रम में डालकर 24 घंटे तक एक निश्चित तापमान में रखा जाता है. और फिर वह शहद उपयोग करने योग्य बन जाता है उसे आप मार्केट में बेचकर लाभ कमा सकते हो

मधुमक्खियों का किट एवं रोग से बचाव करें (Protect bees from kit and disease)

यदि आप शहद का अधिक उत्पादन निकालना चाहते हो तो आपको समय-समय पर मधुमक्खियों की सुरक्षा का ख्याल रखना चाहिए. मधुमक्खी पालन में आमतौर पर माम पतंगे, चीटियां, ततैया, वैक्स भृंग, पक्षी, परजीवी घुन‌ वरोआ विनाशक, मधुमक्खी के कण, इत्यादि कीट होते है
और beekeeping में पाए जाने वाले रोग की बात की जाए तो नौसेमा रोग, अमेरिकन फाउल ब्रुड रोग, थाई सेक ब्रुड वायरस, स्टोन ब्रुड रोग, चाक ब्रुड रोग इत्यादि रोग है इन सभी रोग एवं कीट के नियंत्रण के लिए आप नजदीकी कृषि विभाग में जाकर संपर्क कर सकते हो.

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मधुमक्खी पालन व्यवसाय में लगने वाली लागत ( madhumakhi palan business Cost)

मधुमक्खी पालन व्यवसाय छोटे और बड़े दोनों स्तर पर किया जा सकता है. यदि आप इसे प्रशिक्षण एवं अनुभव लेकर शुरू कर रहे हो तो आप बड़े स्तर पर शुरू कर सकते हो. लेकिन यदि आप बिना अनुभव और प्रशिक्षण के शुरू कर रहे हो तो आपको छोटे स्तर पर शुरू करना चाहिए.
क्योंकि बिना अनुभव और प्रशिक्षण के यदि आप इस बिजनेस को बड़े स्तर पर शुरू कर रहे हो तो आपको बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है. इसीलिए आपको पहले छोटे स्तर से ही शुरुआत करनी चाहिए.

छोटे स्तर पर शुरुआत करने के लिए आप पांच पेटी मधुमक्खा को खरीद कर शुरू कर सकते हो. जिसमें 5 पेटी का खर्च ₹25000 तक आएगा और अन्य खर्च मिलाकर आपको छोटे स्तर पर शुरू करने के लिए 50 हजार रुपए की आवश्यकता होगी.

और वही यदि आप बड़े स्तर पर शुरू करना चाहते हो तो आपको कम से कम 3 से 4 लाख रुपए की आवश्यकता होगी.

हम आपको बता दें कि मधुमक्खियों की संख्या हर साल बढ़ती रहती है. यदि आप 5 पेटी से शुरुआत कर रहे हो तो आप अगले साल इन पेटियों से 15 से 20 पेटी मधुमक्खियां प्राप्त कर लोगे.

मधुमक्खी पालन व्यवसाय में लाभ ( madhumakhi palan business profit)

मधुमक्खी पालन व्यवसाय में मुनाफा बहुत अधीक कमाया जा सकता है.
मधुमक्खियों की 1 पेटी में से लगभग 40 से 50 किलो शहद एक बार में निकाला जा सकता है.
यदि आप 10 पेटियों से शुरुआत करते हो तो आप एक बार में लगभग 500 लीटर शहद निकाल सकते हो. जिसकी मार्केट कीमत की बात की जाए तो शहद की कीमत लगभग 100 से ₹150 किलो रहती है. इस हिसाब से आप महीने के 80 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक का मुनाफा कमा सकते हो. इस व्यवसाय की सबसे खास बात यह है कि इसमें मधुमक्खियों की संख्या हर महीने बढ़ती रहती हैं. जिससे आपका मुनाफा भी बढ़ता जाता है और इस तरह आप मधुमक्खियों से अधिक लाभ कमा सकते हो.

FAQ

मधुमक्खी पालन व्यवसाय शुरू करने में कितना खर्च आता है

छोटे-छोटे शुरू करने करने के लिए 40 से 50 हज़ार की आवश्यकता होगी और यदि बड़े स्तर पर शुरू करना चाहते हो तो आपको 4 से 5 लाख रुपए की आवश्यकता होगी

मधुमक्खी पालन व्यवसाय शुरू करके कितना लाभ कमया जा सकता है
इस व्यवसाय से 70 से 80 हजार रुपए महीना कमाया जा सकता है

इस व्यवसाय से 70 से 80 हजार रुपए महीना कमाया जा सकता है

मधुमक्खी पालन कैसे करें

सबसे पहले प्रशिक्षण या अनुभव प्राप्त करे.
मधुमक्खी पालन के लिए जगह का चयन करें.
मधुमक्खियों की प्रजातियों का चयन करें.
मधुमक्खी पालन के लिए उपकरण की व्यवस्था करें.

मधुमक्खी पालन का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

मधुमक्खी पालन शुरू करने का सबसे अच्छा समय नवंबर से जनवरी के बीच का समय माना जाता है

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